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भााग- 2 "जानती थी वो”

13 March 2024

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कथा खत्‍म होते ही, नम्रता किचन की ओर अपनी ननद चांदनी के साथ चल दी।  

बातो ही बातो में ननद चांदनी ने पूछा कि
भाभीजी आपने कितने दिन की लीव ली है मैने तो एक माह की लीव ली थी आखिर मेरे इकलौते भाई की शादी है, अरे मुझे तो शादी के पहले,
शादी के वक्‍त और शादी के बाद खूब मस्‍ती जो करनी है इसलिये छुटटी लेना तो बनता है। नम्रता
चांदनी की बाते मुस्‍कारते हुये सुन रही थी उसे महसूस हो रहा था कि चांदनी हंसमुख,
मिलनसार होने के साथ ही साथ किचन के कार्यो में निपुण और कुशल है।  

नम्रता ने अपनी पहली रसोई में मटरपनीर, काजू करी, मेथी मलाई, मिक्‍स
वेज, बुंदी और प्‍याज का रायता, पूरी,
कचौरी, पुलाव के साथ ही ब्रेड के दहीबडे भी
बना लिये और हां मीठे में उसने डाईफ्रूट मिक्‍स कर झटपट देशी घी के साथ गुड के लडू
बना लिया। इतना सब बनाते बनाते कब दो बज गये उसे पता ही नहीं चला, उसकी छोटी ननद बराबर उसके साथ लगी रही। चांदनी एकदम चिहुंक कर बोली अरे
वाह इतना सारी वैरायटी खाने में और आप पहली ऐसी बहु होगी जिसने अपनी पहली रसोई में
इतनी सारी वैरायटी बनायी होगी वरना तो लोग अपनी बहू से सूजी का हलवा या गुलगुले
बनवा  कर इतिश्री कर लेते है और हमारे भी
रिश्‍तेदारो को भी ऐसा ही लग रहा होगा।  

खाने की टेबल में इतनी सारी वैरायटी देखकर
सभी रिश्‍तेदार दंग रह गये कि उन्‍हे ऐसा
लगा कि रेस्‍तरा में बैठे हो,  जैसे जैसे डोगे के ढक्‍कन  खुलते जाते और सभी  की आंखे खुली की खुली रह गयी। परिवारजन दिल खोल
खोल कर तारीफ किये जा रहे है कि अरे नौकरी करने वाली बहू है और इतना अच्‍छा खाना बनाती
है, कितनी प्‍यारी और निपुण है और गर्ग भाई यह आप लोगो के
अच्‍छे कर्मो का फल है , आर्शीवाद के साथ ही नेग भी देते
हुये तारीफ करते थक नही रहे है।  

 नम्रता खाना परोसने के दौरान ही अपनी सास से कहा
कि अम्‍मा जी मैं अब से नौकरी नही करुंगी और आप लोगो के साथ ही रहूगी और यदि कुछ
करना ही होगा तो आनलाइन जाब देख लूंगी। अम्‍मा फौरन बोली यह तुम्‍हारा फैसला होना
चाहिये थोडा देख और समझ ले कही बाद में पछतावा न हो कि जल्‍दबाजी में कदम उठा लिया
अभी पगफेरे में मायके जाओगी तो वहाँ भी अपने मम्‍मी पापा से बात कर लेना यहां कोई
दवाब नहीं है और तुम दोनो भी बात कर लो। अजय सिर्फ खाना खाने में मस्‍त है, वाह अम्‍मा क्‍या स्‍वाद है, अब तो अम्‍मा आपके खाने
के स्‍वाद के साथ ही साथ एक और नया स्‍वाद इस परिवार के साथ जुड गया, नम्रता के हाथो का खाना। सभी हंस पडे और पूछने लगे इतनी पढाई लिखायी के
साथ इतना अच्‍छा खाना बनाना कैसे आ गया वह
भी इतने सारे लोगो के लिये बिना डरे बनाने की कला।  

मिस्‍टर गर्ग बोले अरे भई मैने सिर्फ बहू
देखी थी जो सर्वगुण सम्‍पन्‍न हो और कुछ नहीं मुझे चाहिये भी नहीं था और नम्रता बेटा है तो ऐसी ही न ?बोलो भाई इतना सुनते ही  सभी
खिलाखिला कर हंस पडे और अपना अपना गिपट देने लगे।  

नम्रता को आज पूरे पन्‍द्रह दिन हो गये
ससुराल में आये,
कब बीत गये पता ही नहीं चला। उसने 15 दिन का ही अवकाश लिया था क्‍योकि
सभी ने इतना डरा दिया था कि ज्‍यादा दिन रुकने की जरुरत नहीं है वरना वहां लोग
जीना मुश्किल कर देगे काम कराकरा के। चूंकि उन्‍हे घूमने भी जाना है इसलिये छुटटी
तो और लेनी ही होगी, इसलिये कल आफि‍स जाकर छुटटी बढा लेगी यह
सोचते सोचत ही उसे अपने पति अजय की गोद में कब नींद आ गयी पता नहीं चला। 

 सुबह उठकर नहा धोकर किचन में गयी फटाफट खाना
रेडी करके वाह साडी पहन कर तैयार होने लगी तो सासू मां ने बोला कि बेटा आपको जो
पहन कर जाना है,
जाओ कोई जरुरी नहीं है कि साडी ही पहनो, हां
शर्म आंखो और आपके व्‍यवहार में होनी चाहिये इसलिये जो मन है पहन ले। नम्रता बोली
सच में अम्‍मा जी। अरे तुममे और मेरी पांचो बेटियो में कोई अंतर है क्‍या है। हां
तुम भी मुझे अम्‍मा ही समझो वैसे भी चार-चार
दामाद की सास हूं। इसलिये और  सास बनने का मुझे कोई शौक नहीं है, इसलिये तुम मुझे सास कम अपनी मां ज्‍यादा समझो,  चलो मैं नाश्‍ता लगा देती है और तब तक मैं तुम्‍हारा
टिफिन रेडी कर देती हूं। चांदनी बेटा भाभी को अपनी गाडी की चाभी दे दो जिससे वह
आराम से चली जाये। अजय ने भी हां में हां मिला दी और बडे प्‍यार से बोला यार
नम्रमा चांदनी की गाडी लेकर चली जाओ, शादी के बाद पहला दिन
आफि‍स का होगा, पार्टी वगैरह होने में देर सवेर होगी तो अपनी
गाडी रहेगी तो कोई दिक्‍कत नही होगी और यह रखो दस हजार रुपये, बढिया पार्टी देना कोई दिक्‍कत हो मुझे काल करना मैं हाजिर हो जाऊंगा अभी
तो दस दिन मैं छुटी पर ही हूं और यदि मैडम साहिबा की इच्‍छा हो तो मैं खुद तुमको आफि‍स
छोडने चल सकता हूं यदि तुम्‍हारा मन हो तो वह मुस्‍करा कर बोली कि नेकी और पूछ
पूछ।  

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